हर्षद शांतिलाल मेहता, बिग बुल ऑफ स्टॉक मार्केट, 1992 में 4,000 करोड़ के घोटाले से जुड़े। जानें उनका जीवन, स्कैम और शेयर बाजार पर असर।
हर्षद मेहता – बिग बुल और 1992 का 4,000 करोड़ का घोटाला
हर्षद मेहता एक भारतीय स्टॉक ब्रोकर थे जिनका नाम 1992 के सबसे बड़े सिक्योरिटीज स्कैम से जुड़ा हुआ है। उन्हें मीडिया ने “बिग बुल” कहा क्योंकि उनकी वजह से 1990 के दशक की शुरुआत में शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई थी। लेकिन कुछ ही सालों में उनका नाम भारत के सबसे बड़े घोटाले से जुड़ गया जिसने पूरे शेयर बाजार को हिला दिया।

शुरुआती जीवन और शिक्षा
- पूरा नाम: हर्षद शांतिलाल मेहता
- जन्म: 29 जुलाई 1954, पनाली मोती (गुजरात)
- शिक्षा: लाला लाजपत राय कॉलेज, मुंबई से B.Com.
- बचपन में परिवार की मदद के लिए उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए।
- कपड़ों की दुकान पर काम किया।
- कुछ कंपनियों में हेल्पर का काम किया।
शेयर बाजार में प्रवेश
1990 के दशक की शुरुआत में भारतीय अर्थव्यवस्था उदारीकरण के दौर से गुजर रही थी। शेयर बाजार में तेजी थी और हर्षद मेहता इस मौके का फायदा उठा रहे थे।
- वे जिन शेयरों को खरीदते, उनके दाम तेजी से बढ़ जाते।
- इसी कारण उन्हें “बिग बुल” कहा जाने लगा।
- उन्होंने ACC जैसी कंपनियों के शेयरों के दाम ₹200 से बढ़ाकर ₹9,000 तक पहुँचा दिए।
7 चौंकाने वाले तथ्य: हर्षद मेहता की अद्भुत कहानी और शेयर बाजार घोटाला
हर्षद मेहता को शेयर बाजार का “बिग बुल” कहा जाता था। 1992 में उन्होंने बैंकिंग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये कमाए। उनकी लग्जरी लाइफस्टाइल{1}, घोटाला और जेल में 2001 में हुई मौत आज भी लोगों को चौंकाती है।
1992 का 4,000 करोड़ का घोटाला
- हर्षद मेहता को बैंकों की कमजोरियों का पूरा ज्ञान था।
- उन्होंने बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के नाम पर हजारों करोड़ रुपये उधार लिए।
- लेकिन इन पैसों को सरकारी बॉन्ड में लगाने की बजाय सीधे शेयर बाजार में लगा दिया।
- इस भारी निवेश से शेयर बाजार में कृत्रिम तेजी आई।
- उस समय उन्होंने करीब 4,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया।
खुलासा और परिणाम
- इस घोटाले का खुलासा पत्रकार सुचेता दलाल ने किया।
- जब सच सामने आया तो शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई।
- बैंकों को करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
- छोटे निवेशकों की पूँजी डूब गई और पूरा स्टॉक मार्केट हिल गया।
गिरफ्तारी और मौत
- 1992 में इस घोटाले के बाद CBI ने हर्षद मेहता को गिरफ्तार कर लिया।
- उन पर कई मुकदमे चले और वे लंबे समय तक जेल में रहे।
- 31 दिसंबर 2001 को, 47 साल की उम्र में, मुंबई की जेल में ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
निष्कर्ष
हर्षद मेहता का नाम भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। वे एक ओर “बिग बुल” थे जिन्होंने शेयर बाजार में निवेशकों का ध्यान खींचा{2}, तो दूसरी ओर वे 1992 के 4,000 करोड़ के घोटाले के कारण बदनाम भी हुए। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि धोखाधड़ी से मिली सफलता कभी स्थायी नहीं होती।